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पृथ्वी स्वच्छ सुंदर(Aarti Bais)

पृथ्वी स्वच्छ सुंदर

यह भूमि

माटी की

सोंधी गंध

बढ़ाती सागर की बेचैनी।

मीठे पानी की स्मृतियों में

थमने-थमने को

जीवन का संगीत।

यह सदाबहार वन

दहाड़ते शेर,चहचहाते पखेरू

मगन मन नाचते मोर।

झाड़ी पत्ते, हरी चुनर धर इतराते

बादल बंजारे बन आते।

झुक जाती धरा

अलग-अलग श्रृंगार से।

वृक्ष पवन संग

इतराते, लहराते

माटी से रिश्ता गहरा

आकाश से घनिष्ठ मित्रता।

हर श्वास ऋणी इनकी

हर जीव के यह वाहक।

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